गरीबी के चलते एक रोटी तक नहीं मिलती थी इस लड़के को,...

गरीबी के चलते एक रोटी तक नहीं मिलती थी इस लड़के को, आज पूरा बॉलीवुड है इसका दीवाना

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कहते हैं ना वक्त बदलता और एक दिन ऐसा बदलता है कि सब कुछ बदलकर रख देता है।

डायरेक्टर अनुराग कश्यप की फिल्म ‘मुक्केबाज’ 12 जनवरी को र‍िलीज हो रही है। फि‍ल्म के हीरो विनीत सिंह बनारस के रहने वाले हैं। विनीत ने बताया, ”फिल्म की कहानी मैंने और मेरी सिस्टर मुक्ति ने मिलकर लिखी है।

दो साल तक स्टोरी को लेकर घूमते रहा, एक दिन अनुराग कश्यप को स्क्रिप्ट दिखाई, मेरी कंडीशन सिर्फ इतनी थी कि लीड मैं ही करूंगा। उन्होंने 14 दिन बाद रिस्पांस दिया कि मुक्केबाज पर फिल्म बनेगी।” बता दें, व‍िनीत गैंग ऑफ वासेपुर, बॉम्बे टॉल्कीज, अगली, जैसी फि‍ल्मों में दमदार रोल प्ले कर चुके हैं।
लाइफ का एक इंटरेस्टि‍ंग क‍िस्सा शेयर करते हुए विनीत ने बताया, ”छोटी बहन मुक्ति से प्रॉब्लब शेयर करता था। हम दोनों ने मम्मी-पापा को कुछ भी नहीं बताया। कई फिल्मों में काम करने के बाद 2006 में मुंबई में पैसे खत्म हो गए, ऐसे दिन आ गए थे कि रोटी भी सोचकर खाना पड़ता था, ये सोचकर छोड़ देता था कि बचा हुआ सुबह काम आ जाएगा।” ”इसी साल (2006) में वापस घर बनारस चला आया। लेकिन दिल नहीं मान रहा था कि हार मानकर घर बैठ जाऊं। वापस मुंबई गया और कुछ करने की ठानकर इंडस्ट्री के चक्कर लगाए।”
‘इसी बीच मराठी, बंगाली और तमिल फिल्मों में काम मिला। इसके बाद हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में विरुद्ध, पदम् श्री लालू प्रसाद यादव, देह जैसी फिल्में बड़े स्टारकास्ट के साथ करने का मौका मिला। फि‍र जन्नत, क्रुक, जश्न, जैसी फिल्मों में काम मिला।” ”महेश भट्ट की फिल्म ‘भूखा’ में पुलिस इंस्पेक्टर का लीड रोल मिला। किस्मत का सितारा तब और बुलंद हुआ जब अनुराग कश्यप कि फिल्म गैंग्स आफ वासेपुर में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में मनोज वाजपेयी के बड़े बेटे की भूमिका दानिश खान के रूप में मिली, जो काफी चर्चित था।”
विनीत सिंह ने बताया, ”2013 के बाद छोटे काम मिलते रहे, लेकिन अपने लिए कुछ करने के मकसद से मुक्केबाज की स्क्रिप्ट लिखी गई।” ”2016 में हिम्मत जुटा कर स्क्रिप्ट अनुराग सर को दिखाई, क्योकि उनके साथ तीन फिल्में कर चूका था। 14 दिन बाद उनका कॉल आया।” ”उन्होंने कहा कि फिल्म करूंगा, लेकिन दो कंडीशन है। पहले तुमको रीयल मुक्केबाज बनना होगा और थोड़ा सी स्क्रिप्ट बदलनी होगी।” ”उसी दिन बॉक्सिंग हब पटियाला जाने की ठान ली, लेकिन जाने के लिए इतने पैसे नहीं थे।
दोस्तों को कॉल किया और सामन बेचने की बात कही।” ”फिर फर्नीचर से लेकर टीवी तक सारा सामान बेचकर पटियाला पहुंच गया। वहा इंटरनेशनल खिलाड़ियों के बीच ट्रेनिंग लेनी शुरू की।” ”इस दौरान 25 बार से ज्यादा मुहं फूटा, आंखों के ऊपर चोटें आईं। एक बार तो फाइटिंग के दौरान पसलियां भी टूटीं।” ”एक साल तक बहुत ही साधारण डाइट पर रहकर बॉक्सर की ट्रेनिंग ली। वापस आकर अनुराग जी से 2017 में मिला।” बता दें, मुक्ति ने बीएचयू से फिजिकल एजुकेशन से पीएचडी कर चुकी हैं।

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