Ghazals in Hindi

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बोझिल लगने लगती हैं ये साँसें, ज़िन्दगी जब इम्तिहान हो जाए
सुनता नहीं वो फिर किसी की, जब दिल यह बेईमान हो जाए
अल्फ़ाज़ कहो न उर्दू में कुछ, शहद सी यह जुबान हो जाए

किसी का सवाल बन गयी, तो किसी का खयाल बन गयी
छोटी सी नाजुक कली… और फिर गुलाब बन गयी,
निखरता शबाब बन गयी, ग़ज़ल की किताब बन गयी,
छोटी सी नाजुक कली… और फिर गुलाब बन गयी,
आँगन की गुड़िया अब देखो बड़ी सी मिसाल बन गयी
छोटी सी नाजुक कली… और फिर गुलाब बन गयी,
घर की नवाब बन गयी आशिक़ का ख्वाब बन गयी
हसीन महताब बन गयी छोटी सी नाजुक कली… और फिर गुलाब बन गयी,

तुम्हारे साथ आजकल, यूँ हर जगह रहता हूँ मैं
हद से ज्यादा सोचू तुम्हें, बस यहीं सोचता हूँ मैं,
पता नहीं हमारे दरमियान, यह कौनसा रिश्ता है
लगता है के सालों पुराना, अधूरा कोई किस्सा है,
तुम्हारी तस्वीरों में मुझे, अपना साया दिखता है
महसूस करता है जो यह मन, वहीं तो लिखता है,
तुम्हारी आवाज़ सुनने को, हर पल बेक़रार रहता हूँ
नहीं करूँगा याद तुम्हें मैं, खुद से हर बार कहता हूँ,
नाराज़ ना होना कभी, बस यहीं एक गुज़ारिश है
महकी हुई इन साँसों की, साँसों से सिफ़ारिश है,
बदल जाएं चाहे सारा जग, पर ना बदलना तुम कभी
ख़्वाबों के खुशनुमा शहर में, मिलने आना तुम कभी ।

जो देखे वही हैरान हो जाए, दुश्मन भी तेरा कद्रदान हो जाए
आग बन जाए गुलिस्तां यहां, गर कामिल तेरा ईमान हो जाए
इतना भी अकेला न रहना कभी, के खाली दिल का मकान हो जाए

भरी भरी सी हैं ज़िन्दगी, भावो में बहने लगा हूँ,
हाँ मैं तेरे प्यार में फिर से पड़ने लगा हूँ,
सोचा रुक जाएगी ज़िन्दगी, जब उसने मेरे दिल को तोडा
लेकिन तूने आके मेरी ज़िन्दगी में इसका टुकड़ा टुकड़ा जोड़ा,
सपने लेने छोड़ दिया था, लगा था तनहा सा रहने
अब तू मिली ज़िन्दगी में और तेरे सपने के सागर में लगा हूँ बहने,
भरी भरी सी हैं ज़िन्दगी, भावो में बहने लगा हूँ….
चली गयी थी चेहरे की हंसी आने लगे थे दुःख,
तुम मिली ज़िन्दगी में अब सच हैं सारे सुख
प्यार एक शब्दो का खेल हैं. ऐसा लगा था सबसे कहने,
आज तो फिर से प्यार हो गया और लगा हूँ तेरे ख्वाबो में रहने
भरी भरी सी हैं ज़िन्दगी, भावो में बहने लगा हूँ….



आज पास तुम चले आओ, तो कोई बात बने
अपना मुझे भी बनाओ, तो कोई बात बने,
मेरी हर सांस-o-एहसास ने तेरा एतबार किया
हर नजर ने, हर जज़्बे ने तुमसे इज़हार किया,
आज हमे तुम भी चाहो, तो कोई बात बने
मोहबत्त तुम भी जताओ, तो कोई बात बने,
आज वादा तुम भी निभाओ, तो कोई बात बने
एक कसम तुम भी खाओ, तो कोई बात बने,
लिखें हैं ना जाने कितने नगमे इस प्यार ने
मांगी हैं कितनी ही दुआएं पल पल इस इन्तजार ने,
आज गीत तुम भी गुनगुनाओ, तो कोई बात बने
एक ग़ज़ल तुम भी सुनाओ, तो कोई बात बने,
बहुत हैं अरमान साथ तुम्हारे जीने का हमे
इश्क़ के पहलु में मुस्कुरा कर मरने का हमे,
आज अगर तुम भी मान जाओ, तो कोई बात बने
दुनिया अपनी भी दिखाओ, तो कोई बात बने,

शेर घायल है मगर दहाड़ना नहीं भूला
एक बार में सौ को पछाड़ना नहीं भूला।
कुत्ते समझ रहे हैं कि, शेर तो हो चुका है ढ़ेर
उन्हें कौन समझाए कि, ये तो समय का है फेर।
साज़िश और षड्यंत्र के बल पर, हुआ यह सब
वरना आज तक कोई, शेर को मार सका है कब।
विरोधियों ने बैठक बुलाई, नई-नई योजना बनाई
सिंह को वश में करने के लिए, चक्रव्यूह रचना सुझाई।
चौकन्ना एक चीता, हालात जो सब समझ चुका था
ऐसे ही एक जाल में, बहुत पहले खुद फंस चुका था।
कुत्ते गीदड़ सियार लोमड़ी, बेशक सब गए हो मिल
अपनी ही चाल में फंसेगे सब, नहीं अब ये मुश्किल।
शेर ज़ख़्मी है लेकिन शिकार करना नहीं भूला
पंजों से अपने घातक प्रहार करना नहीं भूला।।

आसमान से तारे तोड़ लाता, अगर बस में मेरे होता तेरे कदमो में जन्नत बिछाता, अगर बस में मेरे होता
तुझे दुनिया की सेर करा, एक नया ही जहां दिखलाता, तेरी राहों में फूल बिछाता, अगर बस में मेरे होता
तेरे ख्वाब की हक़ीक़त बन, सपने सारे सच कर जाता, तेरे दर्द को खुद पर झेल जाता, अगर बस में मेरे होता
मैं खुद को तेरा आईना और एक तस्वीर निराली बनाता, तेरे आंसू को अपनी आँखों से गिराता, अगर बस में मेरे होता
तेरे लिए एक ताजमहल बनवाता, प्यार मेरा सबको दिखलाता, खुदा बन तेरी हर एक दुआ पूरी करता, अगर बस में मेरे होता
कितनी मोहब्बत हैं तुमसे मुझे ये तुम्हे समझाने के लिए, अपना दिल तेरे दिल में धड़काता, अगर मेरे बस में होता

पहले दोस्त, दोस्त की मदद करता था दोस्ती के लिए,
आज दोस्त, दोस्त की मदद करता है अक्सर अपने स्वार्थ के लिए
पहले दोस्त पैसा दोस्त को दे देता था हमेशा के लिए,
और दोस्त कैसे भी करके लौटाता था, मन के सुकून के लिए
आज कल दोस्ती तो लगता है, जैसे नाम के लिए रह गयी हैं,
कितना सब बदल गए हैं और कितनी सोच भी बदल गयी हैं
और कहते हैं अपने दोस्त को जो उधार दे वो मूर्ख कहलाये,
और जो उधार वापस करे, वो उससे भी बड़ा मुर्ख कहलाये
दोस्ती का नाम बदनाम हुए जा रहा हैं,
फिर भी किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा हैं
माहौल दिन-ब-दिन ख़राब होता जा रहा हैं,
इंसान का इंसान से विश्वास उठता जा रहा हैं
बदलता माहौल देख बहुत दुःख हो रहा हैं
देखो दोस्तों इंसान कहा से कहा जा रहा हैं |

घबराने से मसले हल नहीं होते, जो आज है, वो कल नहीं होते।
ध्यान रखो इस बात का ज़रूर, कीचड़ में सब कमल नहीं होते।
नफ़ा पहुँचाते हैं जो जिस्म को, मीठे अक्सर वो फल नहीं होते।
जुगाड़ करना पड़ता है हमेशा, रस्ते तो कभी सरल नहीं होते।
दर्द की सर्द हवा से बनते हैं जो, वो ठोस कभी तरल नहीं होते।
नफ़रत की खाद से जो पेड़ पनपते हैं, मीठे उनके कभी फल नहीं होते।
जो आपको आपसे ज्यादा समझे, ऐसे लोग दरअसल नहीं होते।।

होंठो पे अपने होंठ रख दूँ, आ तुझे मैं प्यार कर लू।
साँसों में साँसें घुल जाने दे, बाँहों में बाहें मिल जाने दे।
दो जिस्म हम, जान एक है, इरादे मेरे आज नहीं नेक है।
आग लग रही है, तन-बदन में, जल रहा हूँ मैं प्रेम अगन में।
लबों पे अपने लब रख दूँ, आ तुझे मैं प्यार कर लू।
एक दूजे में खो जाने दे, मुझको तेरा हो जाने दे।
आग लग रही है, तन और मन में, सुलग रहा हूँ मैं, बरसते सावन में।।
चलो ना पूरी तरह बहक जाते है, ताक़त आज अपनी आज़्माते है।



Mohabbaton mein agar koi rasm o raah na ho Sakoon tabaah na ho, zindagi gunaah na ho,
Kuch aetebaal bhi laazim hai dill lagi key liey Kisi sey pyaar agar ho to bepanaah na ho,
Iss ehtyaat sey mai tere saath chalta hun Teri nigaah sey aagey meri nigaah na ho,
Mera wajood hai sachaaion ka aaina Yeh aour baat he mera koi gawaah na ho

Tu ne shayad Mere Mehboob ko dekha hi nahi
Kyun usey Tuu ne bas ek Phool kaha hai Mere Dost
Tu ne shayad Mere Mehboob ko dekha hi nahi
Tu jise itni Haseen cheez samajhta hai wo Phool
Sookh jaaye to Nigaahon ko bura lagta hai
Phool ka apna koi rang koi Roop nahi
Uske Jore mai saja ho to Bhala lagta hai
Mera Mehboob to har Waqt Naya hai Mere Dost
Tu ne shayad Mere Mehboob ko dekha hi nahi
Mere Mehboob ke Jalwon ka nahi koi Jawaab
Dhoop sa rang hai aur khud hai wo Chha’aoon jesa
Uski Payal mai Barsaat ka Mausam Chhanke
Sar pe Resham ka Dupatta hai Ghata’aon jesa
Wo jahan bhar ke Haseeno se juda hai Mere Dost
Tu ne shayad Mere Mehboob ko dekha hi nahi
Mere Mehboob ki Aankhen hain Do Gehri Jheelien
Jin mai khilte hain Mere waaste Chahat ke Kanwal
Unko dekhoon to Mujhe Shayari karni aa jaaye
Aur mai uske lye Gaaon Mohabbat ki Ghazal
Wo Mere Dil ke Dharakne ki sada hai Mere Dost
Tu ne shayad Mere Mehboob ko dekha hi nahi

Garmiye hasrat e nakaam se jal jaate hain…
Garmiye hasrat-e-nakaam se jal jaate hain
Hum chiraagon ki tarah shaam se jal jaate hain
Shama jalti hai jis aag mein numayish ke liye
Hum usi aag mein gumnaam se jal jaate hain
Jab bhi aata hai tera naam mere naam ke saath
jaane kyon log mere naam se jal jaate hain…
Wohi Gardashain Wohi Paich-O-Kham Tere Baad Bhi,
Wohi Houslay Mere Dum Ba Dum Tere Baad Bhi,
Tere Sath Thi Teri Jafa Mujhay Mo’atabar,
Tere Saaray Gham Mujhay Mohtaram Tere Baad Bhi,
Mere Sath He Meri Har Khushi Teri Muntazir,
Teri Muntazir Meri Chasham-E-Namm Tere Baad Bhi,
Tu Kisi K Qalab-O-Arzoo Mein Dhal Gaya,
Main Na Ho Saka Kabhi Khud Mein Zamm Tere Baad Bhi,
Mere Baad Kitnay He Roop Tu Ne Badal Liye,
Main Wohin Hoon Ab Teri Qasam Tere Baad Bhi …



Pal pal uska saath nibhate hum,
Ek ishare par duniya chor jaate hum,
Samnder ke beech mein pahunch kar fareb kiya usne,
Wo kehta to kinare par hi doob jaate hum…
Kisi Se Baat Karna Bolna Achcha Nahi Lagta
Tujhe Dekha Hai Jab Se Dusra Achcha Nahi Lagta
Teri Ankhon Me Jab Se Mai Ne Apna Aks Dekha Hai
Mere Chahre Ko Koi Aaina Achcha Nahi Lagta
Yahan Ahle Muhabbat Omr Bhar Barbad Rahte Hain
Ye Dariya Hai Ise Kachcha Ghada Achcha Nahi Lagta
Tere Bare Me Din Bhar Sunchti Raheti Hoon Laikin
Tere Baare Me Sab Se Puchna Achcha Nahi Lagta
Mai Ab Chahat Ki Us Manzil Me Aa Ponchi Hon Rehana
Teri Janib Kisi Ka Dekhna Achcha Nahi Lagta
Mujhy jeenay ki umeed dobara day do,
Meri doobti kashti ko kinara dy do,
Main dard ke sahil pay tanha khara hun,
Phir aa ke apni baahon ka sahara day do,
Tera daaman to bhara hay sitaron say,
Mujhy sadqay may ik sitara day do,
Mery aangan my aj andhera ha bohat,
Meri dehleez ko phir apna nazara dy do,
Chund lamhy tujhy dekhnay ki hasrat hay bas,
My nay kab kaha waqt apna mujhy sara day do
Apna Use Banana Gar Mere Bas Me Hota
Lout Ata Lout Aana Gar Mere Bas Me Hota
Ankhon Me Unki Jata Surat Badal Badal Kar
Khawabon Me Aana Jana Gar Mere Bas Me Hota
Chahere Ko Muskrahat Se Mai Sajaye Rakhta Hoon
Aye Yaar Muskrana Gar Mere Bas Me Hota
Duniya Se Qatam Karke Rakh Deta Ranj O Gham Ko
Bazm-e-Tarab Sajana Gar Mere Bas Me Hota
Qadmon Me Unke Lakar Taare Bekhair Deta
Taaron Ko Tod Lana Gar Mere Bas Me Hota
Lata Na Naam Bhi Mai Us Bewafa Ka Lab Per
Shahezad Ko Bhulana Gar Mere Bas Me Hota…

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