Phillauri Movie Review Hindi and English

Phillauri Movie Review Hindi and English

116
0
SHARE
Phillauri Movie Review Hindi and English

PHILLAURI STORY

Kanan accidentally marries a ghost, Shashi, while conducting pre-wedding rituals to get rid of bad luck. But as luck would have it, Shashi sticks around and turns into his agony aunt.

PHILLAURI REVIEW

Nothing is scarier than falling in love and having the ghosts of your memories together haunt you. But Kanan (Suraj Sharma) is experiencing a haunting of a more specific kind. He isn’t bothered by memories of a former lover, but by an actual ghost-in-love from another era.

CAST: Anushka Sharma, Suraj Sharma, Diljit Dosanjh, Mehreen Pirzada
DIRECTION: Anshai Lal
GENRE: Drama
DURATION: 2 hours 18 minutes

Kanan marries a tree to ward off back luck before his wedding, and the tree turns out to be the resting place of Shashi (Anushka Sharma), who lived and loved there almost a hundred years ago. As a result of this marriage, Shashi is bound to Kanan, who must figure out a way to take care of the unfinished business that’s causing her to linger around.
Conceptually, Phillauri is a winner and that much was evident from the trailer. The idea is superbly original, culturally on point and has great potential. The problem is, you only get what you see in the trailer. Nothing more (and thankfully nothing less). The hilarious, exciting one-line plot develops into a two-and-a-half hour film that is full of romantic-movie tropes.
The invisibility of the ghost can only get so many laughs; the narrative shifts between Shashi’s past and Kanan’s present seem abrupt; the soulful songs are easy on the ears but strain your eyes by adding to the runtime, and most importantly, Shashi’s story (the emotional core of the film) is largely formulaic.
The actors sweep in and carry the film, though. With his body language and voice modulation, Suraj Sharma nails the confused-aimless millennial and lightens the mood. Mehreen Pirzada’s helpless and hopelessly-in-love Anu is endearing. Diljit Dosanjh brings his trademark goodness to a rather bland role. And as the translucent ghost (kudos to the VFX team), Anushka delivers a solid performance with a weird mix of sadness and humour.
It seems as though Phillauri could have gone in a lot of directions, but it took the road usually travelled.

ये भूतनी डराती नहीं, हंसाती है

कहानी

‘फिल्‍लौरी’ की कहानी में कनन है। उसकी शादी होने वाली है। बैड लक से बचने के लिए वह शादी की रस्‍मों को निभाता है। पेड़ से शादी करता है। लेकिन किस्‍मत तो किस्‍मत है। पेड़ पर शशि रहती है। भूतनी है। कनन से कहती है कि उसने पेड़ से नहीं उससे शादी कर ली है। पीछे पड़ जाती है। मोहल्‍ले की चाची की तरह हर बात पर सलाह देती है।

समीक्षा

प्रेम करना एक बात है और उस प्रेम का याद बनकर हरपल भूत की तरह आपके सिर पर मंडरना एक। यह यकीनन बहुत ही दुखद और डरावना अनुभव है। लेकिन कनन (सूरज शर्मा) का मामला कुछ और है। उसे अपनी पूर्व प्रेमिका की याद नहीं सताती, बल्‍कि उसकी जिंदगी में वाकई एक भूत आ जाती है। वो भी किसी दूसरे युग से।

शशि और कनन की बंध गई डोर

असल में कनन बुरी बला टालने के लिए जिस पेड़ से शादी करता है। शशि‍ नाम की भूतनी उस पेड़ पर बीते 100 वर्षों से रह रही है। अब शादी के बंधन के कारण शशि‍ और कनन की डोर भी बंध गई है। शशि‍ का एक पास्‍ट है, जिसके कारण उसकी आत्‍मा भटक रही है। यानी कनन को उससे पीछा छुड़ाना है तो पहले शशि‍ के उस अधूरे काम को पूरा करना होगा।

ना ट्रेलर से ज्‍यादा ना कम

‘फिल्‍लौरी’ अपनी तरह की एक नई फिल्‍म है। नए आइडिया पर गढ़ी गई एक फ्रेश स्‍टोरी। लेकिन समस्‍या यह है कि आपने जो भी ट्रेलर में देखा है, लगभग वही फिल्‍म में भी देखते हैं। ना कुछ ज्‍यादा और ना ही कुछ कम। यानी यह फिल्‍म एक लाइन के मजेदार प्‍लॉट पर 2 घंटे से अधिक समय तक रची गई रोमांचक कहानी है।

भूत देखकर हंसी आती है, प्‍यार आता है

पर्दे पर आमतौर पर भूत को देखकर जहां खौफ का मंजर होता है, वहीं शशि को देखते ही आपकी हंसी छूटती है। कहानी कभी शशि के पास्‍ट तो कभी कनन के प्रजेंट में चलती है। यह कहीं-कहीं थोड़ी फिसलती भी नजर आती है। फिल्‍म के गाने सुनने में अच्‍छे लगते हैं, लेकिन पर्दे पर उन्‍हें लंबे समय तक देखना कई बार बोर करता है। फिल्‍म के इमोशनल पार्ट, यानी शशि की पिछली जिंदगी की कहानी सेट फॉर्मूले पर गढ़ी गई लगती है।

अनुष्‍का और सूरज ने किया जबरदस्‍त काम

फिल्‍म के सभी कलाकारों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। सूरज शर्मा ने जबरदस्‍त एक्‍टिंग की है। एक कंफ्यूज्‍ड शख्‍स की किरदार में जान फूंकते हैं। मेहरीन पीरजादा भी अच्‍छी लगी हैं। दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपनी अच्‍छाई की छाप छोड़ जाते हैं। अनुष्‍का के किरदार में ह्यूमर भी है, प्‍यार भी, रोमांच भी और दुख भी। खास बात यह है कि वह इन सभी आयामों पर सफल होती हैं। वीएफएक्‍स का काम भी अच्‍छा है।

कुल मिलाकर यह कह सकते हैं

फिल्‍म देखते वक्‍त आप यह सोच सकते हैं कि ‘फिल्‍लौरी’ के कई और आयाम हो सकते हैं। कहानी की बहुत सी और दूसरी दिशाएं हो सकती थीं, लेकिन इसने वही सड़क चुनी जिस पर आमतौर पर सभी चलते हैं।

(source by timesofindia.indiatimes.com)

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY