Sad SMS in Hindi

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इतनी तन्हाइयाँ हैं, डर भी सकती हूँ,
दर्द -ओ- ग़म की आँधियों से, टूट कर बिखर भी सकती हूँ,
तुम मुझसे दूर तो चले गये, पर ये तलक कभी नहीं सोचा,
मैं तो पागल हूँ, मर भी सकती हूँ ?
मैंने पत्थरों को भी रोते देखा है, झरने के रूप में मैंने पेड़ों को प्यासा देखा है, सावन की धुप में,
घुलमिल के बहुत रहते हैं, लोग जो शातिर हैं बहुत मैंने अपनों को तनहा देखा है, बेगानों के रूप में !!

ज़िन्दगी की हसीन राह पर तुम मुझसे आकर टकरा गए
दिखाकर आँखों को ख्वाब प्यारा सा, फिर उसे भिखरा गए
फूल अरमानों के जो भी खिले मेरे दिल में सब मुरझा गए
खुशियों को मेरी लूटकर तुम.., गमो के बादल बरसा गए

तुझे क्या खबर थी की तेरी यादो ने किस-2 तरह सताया
कभी अकेले में हसांया…… तो कभी महफ़िलो में रुलाया

उलझन भरे दिन हैं मेरे, तनहा हैं राते दे जाती हैं जख्म, मुझे तेरी वो बातें,
हम भी बढ़ के थाम लेते तेरा दामन यूँ तूने हमको अगर रुलाया ना होता,
तेरी नजरो के हम भी एक नज़ारे होते जो तूने अपनी नजरो में हमे बसाया होता.
दिल से रुख़स्त हुई कोई ख़्वाहिश;
गिर्या कुछ बे-सबब नहीं आता!

दिल से रुख़स्त हुई कोई ख़्वाहिश;
गिर्या कुछ बे-सबब नहीं आता!

हमारी ज़िंदगी तो कब की भिखर गयी हसरते सारी दिल में ही मर गयी,
चल पड़ी वो जब से बैठ के डोली में हमारी तो जीने की तमन्ना ही मर गयी.

जी में क्या-क्या है अपने ऐ हम-दम;
पर सुखन ता-बलब नहीं आता!

झांखकर देखा होता एक बार तो डोली के अंदर, के हो गया हैं अब मेरी भी ज़िंदगी का पूरा सफर,
तेरे साथ साथ अब मेरी भी मंज़िल ख़त्म हो गयी, बताने ना दिया तूने और कह दिया तू बेवफा हो गयी.



चलो बाँट लेते हैं अपनी सज़ायें;
न तुम याद आओ न हम याद आयें!

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं;
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं!

दिल के लिए हयात का पैगाम बन गयीं;
बैचैनियाँ सिमट के तेरा नाम बन गयीं!

दिल गया रौनक़-ए-हयात गई;
ग़म गया सारी क़ायनात गई!

रंग बातें करें और बातों से ख़ुश्बू आए;
दर्द फूलों की तरह महके अगर तू आए!

दर्द-ओ-ग़म दिल की तबियत बन गए;
अब यहाँ आराम ही आराम है!

दर्द आँखों से निकला तो सबने बोला कायर है ये,
जब दर्द लफ़्ज़ों से निकला तो सब बोले शायर है ये।

जरा तमीज़ से बटोरना बुझे दियों को दोस्तों,
इन्होंने कल अमावस की अन्धेरी रात में हमें रौशनी दी थी;
किसी और को जलाकर खुश होना अलग बात है,
इन्होंने तो ख़ुद को जलाकर हमें ख़ुशी दी थी।

ऐ मौत आ के हमको खामोश तो कर गयी तू;
मगर सदियों दिलों के अंदर, हम गूंजते रहेंगे!

यूँ तो ऐ ज़िंदगी तेरे सफर से शिकायतें बहुत थी;
मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे तो कतारें बहुत थी।

यह भी एक ज़माना देख लिया है हम ने;
​दर्द जो सुनाया अपना तो तालियां बज उठीं​।

फलक देता है जिसको ऐश उसको गम भी देता है;
जहाँ बजते हैं नक्कारे, वहीं मातम भी होते हैं।



वो शायर होते हैं जो शायरी करते हैं;
हम तो बदनाम से लोग हैं, बस दर्द लिखते हैं।

जिंदगी इतना दर्द नहीं देती कि मरने को जी चाहे;
बस लोग इतने दर्द दे जाते हैं कि, जीने को दिल नहीं करता।

आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की;
हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की।

आदम का जिस्म जब कि अनासिर से मिल बना;
कुछ आग बच रही थी सो आशिक़ का दिल बना!

मत पूछ कि मेरा कारोबार क्या है;
मोहब्बत की छोटी सी दुकान है नफरत के बाजार में!

बड़ा शोर सुनते थे पहलू में दिल का;
जो चीरा तो इक क़तरा-ए-ख़ूँ न निकला!

दिल ही तो है न संग-ओ-ख़िश्त दर्द से भर न आए क्यों;
रोयेंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताए क्यों

जब खाक ही होना था मुझको तो खाक-ए-रह-ए-सहरा होता,
इक कोशिश-ए-पैहम तो होती, उड़ता होता, गिरता होता।

अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,
गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।

अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें;
मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।

कुछ दर्द होना ही चाहिए, जिंदगी मे जनाब;
ज़िंदा होने का अनुमान बना रहता है।

सौ बार मरना चाहा निगाहों में डूब कर ‘फ़राज़’;
वो निगाह झुका लेते हैं हमें मरने नहीं देते।

न कुछ फ़ना की ख़बर है न है बक़ा मालूम;
बस एक बे-ख़बरी है सो वो भी क्या मालूम!

झूठी हँसी से जख्म और बढ़ता गया;
इससे बेहतर था खुलकर रो लिए होते!

सब्र रखते हैं, बड़े ही सब्र से हम;
वरना ज़िंदगी जीना कोई आसान तो नहीं!

जब बेअसर से लगने लगें मन्नतों के धागे;
समझ लो अभी और बाकी है इम्तिहान इसके आगे!



रूतबा ही अलग होता है उन आँखों का जिनके पास उनकी मोहब्बत होती है;
वरना कुछ क़तरे ही काफी होते हैं हमेशा किसी नज़र की वीरानी बता जाने को।

ख्वाहिश तो ना थी किसी से दिल लगाने की;
मगर जब किस्मत में ही दर्द लिखा था, तो मोहब्बत कैसे ना होती!

कोई देख ना सका उसकी बेबसी;
जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों मे डालकर।

दर्द को मुस्कुराकर सहना क्या सीख लिया;
सब ने सोच लिया मुझे तकलीफ़ नहीं होती।

हमनें दुनिया में मोहब्बत का असर ज़िंदा किया है;
हमनें नफ़रत को गले मिल-मिल के शर्मिंदा किया है।

मेरे सजदों में कमी तो न थी ऐ खुदा;
या मुझ से भी बढ़कर किसी ने माँगा था उसको।

दिल की बर्बादियों पे नाज़ाँ हूँ;
फ़तेह पा कर शिकस्त खाई है।

अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें;
कुछ दर्द कलेजे से लगाने के लिए हैं।

गर डूबना ही अपना मुक़द्दर है तो सुनो;
डूबेंगे हम ज़रूर मगर नाख़ुदा के साथ।

इतनी सी बात पे दिल की धड़कन रुक गई `फ़राज़`;
एक पल जो तसव्वुर किया तेरे बिना जीने का।

चला जाता हूँ हँसता-खेलता मौजे-हवादिस से;
अगर आसानियाँ हों जिन्दगी दुश्वार हो जाये|

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना;
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना!

चालाकी कहाँ मिलती है, मुझे भी बता दो दोस्तों;
हर कोई ठग ले जाता है, जरा सा मीठा बोल कर!

कोई सुलह करा दे जिदंगी की उलझनों से;
बड़ी तलब लगी है आज मुस्कुराने की!

बचा लिया मुझे तूफां की मौज ने वर्ना;
किनारे वाले सफीना मेरा डुबो देते।

गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं;
मैं आ गया हूँ, बता इंतज़ाम क्या क्या हैं;
फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं;
तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या है।

गर जिंदगी में मिल गए फिर इत्तेफ़ाक़ से;
पूछेंगे अपना हाल तेरी बेबसी से हम।




आह जो दिल से निकाली जाएगी;
क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी।

वह अफसाना जिसे अंजाम तक, लाना न हो मुमकिन;
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर, छोड़ना अच्छा।

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में;
तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।

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