पद्मावत: फिल्म के 3 ऐसे सीन जिन्हें देखकर आप अपनी वास्तविकता खो...

पद्मावत: फिल्म के 3 ऐसे सीन जिन्हें देखकर आप अपनी वास्तविकता खो सकते हैं

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विवादित फिल्म ‘पद्मावत’ रिलीज हुयी भी हुयी और कमाई भी कर रही है. फिल्म की चारों तरफ खुले मुंह से बड़ाई हो रही है. फिल्म का पिक्चराइज़ेशन, कलाकारों की शानदार एक्टिंग, गाने सभी अल्टीमेट है. उन बारे में हम चर्चा भी कर चुके हैं. और जो बाकी हैं उनके बारे में आगे चर्चा करते रहेंगे.

लेकिन फिल्म की एक खास बात और है जिसके बारे में अभी तक किसी ने शायद ही चर्चा की हो, बेशक उस खास बात में लगभग सभी दर्शकों का ध्यान गया हो. मसलन हमें तो उस बारे में चर्चा करनी ही चाहिये.

हम बात कर रहे हैं फिल्म के कुछ खास और अल्टीमेट सीन्स की. जिनका पिक्चराइजेशन, उस पर्टिकुलर सीन में कलाकार की एक्टिंग, लोककथाओं को पर्दे में उतारने की संजय लीला भंसाली की शानदार सिद्धता, सब कुछ एक साथ नज़र आती है.

खाता हुआ अलाउद्दीन-

अगर आपने फिल्म देखी है तो आपको वो सीन याद ही होगा जिसमें अलाउद्दीन खाना खाते हुये नज़र आता है. इसके अलावा आपको वो सीन भी याद होगा जिसमें रावल रतन सिंह खाते हुये नज़र आते हैं. दोनों सीन्स के बीच का बेसिक डिफरेंस सिर्फ इतना है कि उन्हें ऐसे फिल्माया गया है कि अलाउद्दीन और रतन सिंह के कैरेक्टर का प्रतिबिंब उन्हीं सीन से झलक जाता है. जहां रतन सिंह एक सभ्य इंसान की तरह खाते हुये नज़र आते हैं तो वहीं अलाउद्दीन का खाने का तरीका इतना बर्बरता पूर्ण होता है कि वो रोटियों और नॉनवेज को भी किसी दुश्मन राजा की तरह ट्रीट करता है. मुर्गे को किसी जानवर की तरह चबाना उसकी हैवानियत दिखा जाता है.

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सर कट जाने के बाद भी लड़ता रहता है रावल रतन सिंह का सेनापति-

रावल रतन सिंह का वीर सेनापति सर के कट जाने के बाद भी तलवार चलाता रहता है. सीन को कुछ इस तरह फिल्माया गया है कि सिनेमा में बैठा कोई भी दर्शक वीर रस से भर उठे. किसी कहानीकार की खास बात क्या होती है, कि वो कहानी को कुछ ऐसा पेश कर दे कि लोग उस कहानी में खो जायें. बिल्कुल यही काम एक फिल्मकार का भी होता है कि वो दर्शकों को फिल्म के अंदर की अद्भुत दुनिया की सैर करा दे. और संजय लीला भंसाली ये कर पाने में सफल हुये हैं.

निकाह के दौरान व्यभिचारी और वहशी अलाउद्दीन

फिल्म में शुरुआत में ही एक सीन है जिसमें अपने निकाह वाले दिन ही एक लड़की के साथ हमबिस्तर हो रहे अलाउद्दीन को एक सैनिक देख लेता है. और अपनी इस हरकत को लोगों के सामने आने से रोकने के लिये वो उसकी निर्मम हत्या कर देता है. उसके बाद खून से लथपथ अलाउद्दीन पागलों की तरह जब अपने ही निकाह के दौरान नाचता है. तो उसका वहशीपन साफ नज़र आता है.

इन कुछ सीन्स के अलावा फिल्म में ऐसे कई सीन भरे पड़े हैं जिनको फिल्माने में संजयलीला भंसाली ने अपना बेस्ट दे दिया है. आप उदाहरण के तौर पर बताये गये इन सीन्स के बारे में सोचके ही सिहर सकते हैं. और यही एक फिल्मकार के तौर पर भंसाली की जीत है.

ये सीन ऐसे हैं कि आप इनमें इतना खो जायेंगे कि आप वास्तव में क्या हैं याद ही नहीं रहेगा. बस आप फिल्म के किसी पात्र की तरह बन जायेंगे जो कहानी को खुद से जोड़ लेता है.

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