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The Accidental Prime Minister Movie Review

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The Accidental Prime Minister Movie Review

इंटरेस्टिंग और जबर्दस्त पॉलिटिकल मैसेज देती है ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’, लेकिन एंटरटेनमेंट वैल्यू की है कमी

‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ (The Accidental Prime Minister) में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (Dr. Manmohan Singh) के राजनीतिक सफर को दिखाकर डायरेक्टर विजय गुट्टे ने एक इंटरेस्टिंग और जबर्दस्त पॉलिटिकल मैसेज दिया है। फिल्म डॉ. सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू (Sanjay Baru) की इसी नाम से आई बुक पर बेस्ड है। फिल्म के रिलीज का वक्त इसे और भी रोचक बना देता है, क्योंकि आम चुनाव होने ही वाले हैं। फिल्म जाहिरतौर पर 2004 से 2013 तक रही पार्टी के बारे में कुछ राज खोलने का प्रयास करती है।

‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ की कहानी:

फिल्म की कहानी संजय बारू (जिनका रोल अक्षय खन्ना (Akshay Khanna) ने किया है) सुनाते हैं। वे बताते हैं कि प्रधानमंत्री के कार्यकाल के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह के साथ क्या कुछ हुआ? कैसे वे जीनियस, लेकिन कमजोर प्रधानमंत्री और आखिर में पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के हाथों की कठपुतली बनकर रह गए। इसमें सोनिया गांधी, उनके बेटे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और उनके सलाहकार को महत्वाकांक्षी और अभिमानी पॉलिटिकल प्लेयर्स के रूप में दिखाया गया है।


The Accidental Prime Minister | Official Trailer

जबकि डॉ. सिंह को ऐसे इंसान के तौर पर पेश किया गया है, जो देश के लिए बेहतर करना चाहता है, लेकिन सोनिया गांधी के दबाव और अपने मैनिपुलेटिव स्किल में कमी की वजह से कुछ नहीं कर पाते। जहां फिल्म को लेकर विवाद जारी है कि इसमें मुख्य तथ्यों और हिस्ट्री को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया हो तो वहीं इसका उद्देश्य बिल्कुल साफ है। एक कमजोर और सीधे सादे इंसान (ताकि कुछ गलत हो तो उसे जिम्मेदार ठहराया जा सके।) को फ्रंट में रहकर अप्रत्यक्ष रूप से देश पर शासन करने की सोनिया की साजिश पर कहानी में जोर दिया गया है।

‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ का रिव्यू

फिल्म पक्षपातपूर्ण है। इसमें एंटरटेनमेंट वैल्यू भी बहुत कम है। इसके अलावा फिल्म इसके जॉनर को लेकर भी कन्फ्यूज करती है। क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर असल फुटेज का इस्तेमाल किया है, जिन्हें देखने के बाद यह डॉक्यु ड्रामा का फील देती है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक उससे बिल्कुल ही अलग है, जो पर्दे पर दिखाया जा रहा है।

फिल्म का सबसे अच्छा हिस्सा स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस है। सुजैन बर्नेट (Suzanne Bernert) ने सोनिया गांधी के रोल में जबर्दस्त काम किया है। वे सोनिया गांधी के तौर-तरीकों को सटीकता के साथ पर्दे पर उतारती दिखी हैं। टाइटल कैरेक्टर के रूप में दिखाई दे रहे अनुपम खेर (Anupam Kher) डॉ. मनमोहन सिंह जैसे दिखे हैं और उनकी तरह बात करते भी नजर आए हैं। हालांकि, उनकी चाल विषय का अनुकरण करने की तुलना में उसका मखौल उड़ाती जान पड़ती है। प्रियंका गांधी के रोल में अहाना कुमरा (Aahana Kumra) और राहुल राहुल गांधी के किरदार में अर्जुन माथुर (Arjun Mathur) के पास करने लायक ज्यादा कुछ नहीं है। संजय बारू के रोल में अक्षय खन्ना सटीक बैठे हैं। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ किरदार निभाया है। अक्षय का चार्म देखकर लगता है कि वे बेहतर फिल्म डिजर्व करते हैं।

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